Thursday, April 2, 2026
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 नीतीश कुमार के सामने मदरसा शिक्षकों को सजदा कराने की कोशिश नाकाम!

नीतीश कुमार के भाषण से निराश शिक्षकों का जोरदार हंगामा

पटना: इंसाफ न्यूज ऑनलाइन

बिहार मदरसा बोर्ड के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाषण से निराश शिक्षकों ने जमकर हंगामा किया और ‘नीतीश कुमार मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा ऑडिटोरियम गूंज उठा. प्रदर्शनकारी मंच पर पहुंच गए और आयोजकों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया.

दरअसल, मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष सलीम परवेज ने पूरे बिहार के मदरसा शिक्षकों को यह कहकर कार्यक्रम में बुलाया था कि नीतीश कुमार इस कार्यक्रम में 1659 मदरसों को मंजूरी देने और मदरसा शिक्षकों की सैलरी बढ़ाने का ऐलान करेंगे, लेकिन नीतीश कुमार के भाषण में ऐसा कुछ नहीं था. इसके बजाय, वे मुसलमानों पर एहसान जताते हुए दिखे.

पटना में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ कई मंत्री भी मौजूद थे. इसी दौरान, मदरसा शिक्षकों ने सैलरी का मुद्दा उठाया और नाराजगी जाहिर की.

नाराज शिक्षकों ने बताया कि 209 मदरसों के शिक्षकों की सैलरी रुकी हुई है, और इनमें से कई शिक्षकों को डेढ़ साल से सैलरी नहीं मिली है. शिक्षकों ने इसी को लेकर आवाज उठाई. जब कार्यक्रम के दौरान हंगामा शुरू हुआ, तो नीतीश कुमार ने आगे बढ़कर जानना चाहा कि क्या समस्या है.

नाराज शिक्षकों ने कहा कि हमें कार्यक्रम में बुलाने के लिए 1659 मदरसों से संबंधित एक बड़ा ऐलान करने का वादा किया गया था. वादे के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या उनके मंत्रियों की तरफ से इस बारे में कोई ऐलान किया जाएगा, लेकिन नीतीश कुमार और उनके किसी भी मंत्री ने मदरसों के विकास, मदरसों की मंजूरी और सैलरी में बढ़ोतरी से संबंधित कोई भी ऐलान नहीं किया.

<blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”en” dir=”ltr”>VIDEO | Patna: Madarsa teachers protest in front of Bihar CM Nitish Kumar at Bapu Sabhagar, where he arrived to address the State Madarsa Education Board ‘Shatabdi Samaroh’.<br><br>(Full video available on PTI Videos – <a href=”https://t.co/n147TvrpG7″>https://t.co/n147TvrpG7</a>) <a href=”https://t.co/rqswWwlTwm”>pic.twitter.com/rqswWwlTwm</a></p>&mdash; Press Trust of India (@PTI_News) <a href=”https://twitter.com/PTI_News/status/1958429106451951826?ref_src=twsrc%5Etfw”>August 21, 2025</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>

हंगामा जारी रहा

इससे नाराज उम्मीदवारों ने हंगामा शुरू कर दिया. यह हंगामा मुख्यमंत्री के जाने के बाद भी जारी रहा. किसी तरह हालात पर काबू पाया गया और लोगों को समझाने की कोशिश की गई. बिहार मदरसा बोर्ड के 100 साल पूरे होने के अवसर पर बिहार मदरसा एजुकेशन बोर्ड की तरफ से पटना के बापू ऑडिटोरियम में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें पूरे बिहार से मुसलमानों ने भाग लिया था. बिहार में 3558 मदरसे हैं, जिनमें से सरकार फिलहाल 1942 मदरसों को आर्थिक मदद देती है.

Madrasa teacher Agitation

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि “हम ही आपके लिए काम कर रहे हैं और करते रहेंगे, इस बात को ध्यान में रखें.” मदरसा शिक्षकों ने कहा कि “अगर मुख्यमंत्री हमें ग्रांट देंगे तो नीतीश कुमार फिर आएंगे.”

सरकारी दावे और मुस्लिम समुदाय की नाराजगी

बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 3200 मदरसों में से 1600 को राज्य सरकार ग्रांट देती है, जबकि बाकी को ग्रांट नहीं मिलती है. पुराने मौलवी फाजिल की सैलरी करीब 50 हजार है, जबकि नई नियुक्तियों की सैलरी 24 से 34 हजार के आसपास है. इनमें आलिम ग्रेजुएट, मौलवी इंटर, फौकानिया मैट्रिक और आठवीं कक्षा तक वस्तानिया शामिल हैं.

अपने भाषण में, मुख्यमंत्री ने भागलपुर दंगा, कब्रिस्तान की घेराबंदी और मुस्लिम समुदाय के लिए किए जा रहे कामों का जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 के बजट में 284 गुना की बढ़ोतरी हुई है, अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट 1000 करोड़ से ज्यादा हो गया है. उन्होंने तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के लिए खास मदद का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय से यह भी कहा कि “आप लोग महिलाओं को न छोड़ें, उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.” इस पर हॉल में बैठे लोग हंसने लगे.

Madrasa teacher Agitation

नीतीश कुमार ने कहा कि “हम आप लोगों के लिए काम करने वाले हैं, पहले वाली सरकार ने कोई काम नहीं किया है. कुछ लोग हर तरह की बातें कह रहे हैं, उस पर ध्यान न दें, हम आगे भी काम करेंगे. अगर आप लोगों को कोई समस्या है, तो हमें बताएं हम उसे भी हल कर देंगे.”

बिहार में 17% मुस्लिम आबादी है. 240 विधानसभा सीटों में 70 से 80 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल में मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है. मुस्लिम बहुल इलाका सीमांचल आज भी पिछड़ा हुआ है.

पिछले 20 सालों के दौरान नीतीश कुमार को मुसलमानों ने बड़ी संख्या में वोट दिया है, लेकिन हाल के वर्षों में नीतीश कुमार पूरी तरह से बीजेपी के एजेंडे पर चल रहे हैं. वक्फ बिल पर नीतीश कुमार के रुख से मुसलमानों में तीव्र नाराजगी है और इस नाराजगी की झलक आज भी मिली.

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