Wednesday, February 4, 2026
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चीफ जस्टिस से ममता बनर्जी की दो टूक अपील: “कृपया संविधान को बचाइए”

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की मौजूदगी में ममता बनर्जी ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की अपील की और केंद्र पर फास्ट ट्रैक कोर्ट फंड रोकने का आरोप लगाया।

जलपाईगुड़ी: इंसाफ न्यूज़ ऑनलाइन

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्य कांत मिश्रा की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संविधान की रक्षा की अपील करते हुए कहा,
“आप देश की सबसे बड़ी अदालत के संरक्षक हैं, आप पर संविधान की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

जलपाईगुड़ी में कोलकाता हाई कोर्ट के सर्किट बेंच की नई इमारत के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में फास्ट ट्रैक अदालतों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने फंड जारी करना बंद कर दिया है। इस मौके पर उन्होंने वहां मौजूद सभी न्यायाधीशों से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने की अपील भी की। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा,
“आज उत्तर बंगाल के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। यह एक बड़ा मील का पत्थर है। यह इमारत कोलकाता हाई कोर्ट की इमारत से भी बड़ी है।”

जलपाईगुड़ी में 40.8 एकड़ क्षेत्र में निर्मित इस नई इमारत पर लगभग  500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस परिसर में न्यायाधीशों के आवास के लिए 80 कमरे, चीफ जस्टिस के लिए एक अलग बंगला और छह अदालतें स्थापित की गई हैं।

ममता बनर्जी ने बताया कि उनकी सरकार ने राज्य के न्यायिक बुनियादी ढांचे पर 1,200 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके बाद उन्होंने नई अदालतों के निर्माण के मामले में केंद्र की कथित उपेक्षा पर कड़ी नाराज़गी जताई। केंद्रीय कानून मंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,

“कृपया बुरा न मानें, लेकिन केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक अदालतों के निर्माण के लिए फंड देना बंद कर दिया है।”
हालांकि इस आरोप पर केंद्रीय कानून मंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में कुल 88 फास्ट ट्रैक अदालतें  स्थापित की गई हैं, जिनमें 52 महिलाओं के लिए, 7 पॉक्सो (बच्चों के यौन अपराध) से संबंधित, 4 लेबर अदालतें और 19 मानवाधिकार अदालतें शामिल हैं। ममता बनर्जी ने कहा,
“हम न्यायिक व्यवस्था के लिए और भी बहुत कुछ करना चाहते हैं।”

इस अवसर पर ममता बनर्जी ने कहा, “चार चीज़ें हमारे लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं—पहला संविधान, दूसरा देश के नागरिक, तीसरा न्यायिक व्यवस्था और चौथा मीडिया।”
उन्होंने चीफ जस्टिस और सभी न्यायाधीशों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी संकट के समय संविधान, लोकतंत्र, देश की सुरक्षा, इतिहास और सीमाओं की रक्षा बनी रहे।

ममता बनर्जी ने एक बार फिर ‘मीडिया ट्रायल’ के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले सार्वजनिक रूप से किसी को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कुछ एजेंसियां इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही हैं।उन्होंने न्यायाधीशों से अपील करते हुए कहा,
“कृपया लोगों को मानहानि से बचाइए। मैं यह अपने लिए नहीं कह रही हूं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश को बचाने की बात कर रही हूं। हम आपकी अभिरक्षा में हैं और आप संविधान के संरक्षक हैं। आपसे अधिक शक्तिशाली कोई नहीं है।”

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जूनियर वकीलों की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा,
“मैं सभी से अनुरोध करती हूं कि नई पीढ़ी की रक्षा करें। जूनियर वकील संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें बेहतर अवसर और सुविधाएं प्रदान की जाएं।”

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