न्यूयॉर्क / वाशिंगटन:
दुनिया भर में पत्रकारों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई (क्रैकडाउन) बदस्तूर जारी है। ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (CPJ) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक दुनिया भर की जेलों में 330 पत्रकार बंद थे। यह लगातार पांचवां साल है जब यह संख्या 300 के आंकड़े को पार कर गई है।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, 1992 में वैश्विक स्तर पर जेल में बंद पत्रकारों के आंकड़े जमा करने की शुरुआत के बाद से यह तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। हालांकि, यह संख्या 2024 के अंत में दर्ज रिकॉर्ड (384 पत्रकार) से थोड़ी कम है।
चीन अभी भी शीर्ष पर
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में सबसे ज्यादा 50 पत्रकार जेल में बंद हैं। इसके बाद म्यांमार में 30 और इजरायल में 29 फिलिस्तीनी पत्रकारों को हिरासत में रखा गया है। रूस 27 पत्रकारों के साथ चौथे नंबर पर है (जिनमें पांच यूक्रेनी पत्रकार शामिल हैं), जबकि बेलारूस में 25 और अजरबैजान में 24 पत्रकार जेल में हैं।
CPJ के अनुसार:
“यह रिकॉर्ड संख्या दुनिया भर में बढ़ती तानाशाही और सशस्त्र संघर्षों (armed conflicts) में इजाफे को दर्शाती है।”
बिना सजा के कैद, लंबी सजाएं और टॉर्चर
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि जेल में बंद लगभग आधे पत्रकारों को किसी अपराध में सजा नहीं सुनाई गई है, बल्कि वे लंबे समय से ‘विचाराधीन हिरासत’ (under-trial detention) में हैं। जिन पत्रकारों को सजा सुनाई जा चुकी है, उनमें से एक तिहाई से अधिक पांच साल या उससे ज्यादा समय से जेल काट रहे हैं।
CPJ की रिपोर्ट के अन्य मुख्य बिंदु:
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लगभग एक तिहाई जेल में बंद पत्रकारों को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
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20% पत्रकारों ने टॉर्चर या मारपीट की शिकायत की।
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1992 के बाद से, कैद किए गए पत्रकारों पर टॉर्चर के सबसे अधिक मामले ईरान में दर्ज किए गए, जिसके बाद इजरायल और मिस्र का नंबर आता है।
एशिया सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र
2025 में एशिया पत्रकारों के लिए सबसे कठिन क्षेत्र रहा, जहां कुल 110 पत्रकार जेल में बंद हैं। चीन और म्यांमार के अलावा अन्य देशों की स्थिति इस प्रकार है:
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वियतनाम: 16 पत्रकार
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बांग्लादेश: 4 पत्रकार
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भारत: 3 पत्रकार
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फिलीपींस: 1 पत्रकार
अमेरिका में भी एक मामला
रिपोर्ट में अमेरिका के एक मामले का भी जिक्र है, जहां अल सल्वाडोर के पत्रकार मारियो ग्वेरा को जून 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उन्हें आव्रजन स्थिति (immigration status) के आधार पर निर्वासित कर दिया गया, इसलिए वे दिसंबर की अंतिम गणना में शामिल नहीं थे।
पत्रकारिता पर दबाव बरकरार
CPJ की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि दुनिया के कई देशों में पत्रकारों को खामोश करने के लिए हिरासत, लंबे मुकदमे, सख्त सजा और टॉर्चर को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) के लिए एक गंभीर खतरा है।
