द ढाका: इंसाफ न्यूज ऑनलाइन
17 फरवरी, 2026
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे, तारिक रहमान, देश के पिछले 35 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में पहले पुरुष प्रधानमंत्री बन गए हैं।
बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने मंगलवार (17 फरवरी) को पद की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह पिछले सप्ताह हुए संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित किया गया। 2024 के विरोध प्रदर्शनों और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद ये देश के पहले आम चुनाव थे, जिन्हें बांग्लादेश के भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस समारोह में कैबिनेट के दर्जनों सदस्यों ने भी शपथ ली। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की।

चुनावी आंकड़े और गठबंधन
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके सहयोगियों ने संसद में 212 सीटें हासिल की हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन ने 77 सीटें जीतकर विपक्ष की भूमिका संभाली है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में 300 सांसद सीधे चुने जाते हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जो जीतने वाले दलों के बीच उनके मतों के अनुपात में आवंटित की जाती हैं।
60 वर्षीय तारिक रहमान, जो लंदन में 17 वर्षों का स्व-निर्वासन बिताने के बाद पिछले दिसंबर में स्वदेश लौटे थे, ने 17 करोड़ जनता से देश में लोकतंत्र की बहाली और स्थिरता का वादा किया है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन चुनावों की निगरानी की, जिसे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने समग्र रूप से शांतिपूर्ण और स्वीकार्य करार दिया है।

शेख हसीना की अनुपस्थिति और प्रतिक्रिया
तारिक रहमान की मुख्य प्रतिद्वंद्वी और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना की पार्टी पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया गया था। डॉ. यूनुस के प्रशासन ने हसीना की पार्टी की सभी राजनीतिक गतिविधियों को निलंबित कर दिया था, जिसने देश पर 15 वर्षों तक एकछत्र शासन किया था।
भारत में रह रहीं शेख हसीना ने इन चुनावों को अपनी पार्टी के लिए “अन्यायपूर्ण” बताया। ज्ञात हो कि बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को 2024 के विद्रोह के दौरान हुई मौतों के लिए ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। हसीना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अदालत को “कंगारू कोर्ट” (अवैध अदालत) कहा है।
विक्ट्री स्पीच: “यह लोकतंत्र की जीत है”
बीएनपी प्रमुख और देश के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के उत्तराधिकारी तारिक रहमान ने भारी बहुमत से जीत के बाद शनिवार को अपने विजय भाषण में कहा, “यह बांग्लादेश की जीत है, यह लोकतंत्र की जीत है।” उन्होंने आगे कहा, “यह उनकी जीत है जो लोकतंत्र के आकांक्षी हैं और इसके लिए बलिदान दे चुके हैं।”
उन्होंने वर्षों के कड़वे राजनीतिक संघर्ष से विभाजित देश की सभी पार्टियों से “एकजुट रहने” का आह्वान किया। रहमान ने कहा:
“हम एक ऐसे दौर में अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं जहाँ हमें तानाशाही शासन द्वारा विरासत में मिली कमजोर अर्थव्यवस्था, जर्जर संवैधानिक व कानूनी संस्थानों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।”
शांतिपूर्ण विपक्ष और भविष्य की चुनौतियां
तारिक रहमान की जीत एक आश्चर्यजनक बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि वे 17 वर्षों तक ब्रिटेन में निर्वासित रहे और ढाका की सक्रिय राजनीति से दूर थे।
यद्यपि जमात-ए-इस्लामी ने 77 सीटें जीती हैं, लेकिन उसने 32 निर्वाचन क्षेत्रों में परिणामों को चुनौती दी है। हालांकि, पार्टी नेता 67 वर्षीय शफीकुर रहमान ने स्पष्ट किया कि जमात-ए-इस्लामी एक “सतर्क, सैद्धांतिक और शांतिपूर्ण विपक्ष” की भूमिका निभाएगी।
क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक थॉमस केन ने टिप्पणी की कि यदि बीएनपी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन कर पाई, तो सरकार के लिए आगे का रास्ता आसान हो जाएगा और इससे देश में स्थिरता का माहौल बनेगा।
