नई दिल्ली: बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (आईसीटी) ने रविवार (1 जून) को देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और दो अन्य लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराधों और अन्य आरोपों में औपचारिक रूप से अभियोग तय किया.
इन आरोपों में सामूहिक हत्या भी शामिल है. यह आरोप पिछले साल छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने में उनकी कथित भूमिका को लेकर लगाए गए हैं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे.
हसीना के साथ जिन दो अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, वे हैं पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल ममून.
जस्टिस गोलाम मुर्तजा माजुमदार की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की आईसीटी पीठ ने कहा, ‘हम इन आरोपों को संज्ञान में लेते हैं.’
ट्राइब्यूनल ने जांचकर्ताओं को आदेश दिया कि तीनों आरोपियों को 16 जून को अदालत में पेश किया जाए. ममून इस समय पुलिस हिरासत में हैं, जबकि हसीना और कमाल विदेश में रह रहे हैं.
आईसीटी में दोषी पाए जाने पर हसीना और अन्य आरोपियों को मृत्युदंड भी दिया जा सकता है.
बांग्लादेश में पहली बार मुकदमे की लाइव प्रसारण
आईसीटी में इस मामले की सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट किया गया, जो बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार हुआ.
मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम द्वारा दाखिल की गई शिकायत में पांच प्रमुख आरोप बताए गए हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्य शामिल हैं.
ये कथित अपराध कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अवामी लीग की सशस्त्र इकाइयों द्वारा किए गए बताए गए हैं.
एक विशेष आरोप उस हिंसक कार्रवाई से जुड़ा है, जो 14 जुलाई 2024 को हसीना की एक प्रेस कांफ्रेंस के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई थी. अभियोजकों का दावा है कि इसके बाद कमाल, ममून और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इस हमले को अंजाम देने और उसका संचालन करने में सीधा योगदान दिया.
