गांधीनगर | विशेष रिपोर्ट (इंसाफ न्यूज ऑनलाइन)
गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (UCC) बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, विरासत और ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के लिए एक साझा कानूनी ढांचा स्थापित करना है। यह कानून पूरे राज्य के साथ-साथ राज्य से बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (ST) को उनके पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के तहत इस कानून से बाहर रखा गया है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान और दंड:
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बिल पेश करते हुए इसे संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित बताया। विधेयक की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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अनिवार्य पंजीकरण: विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना होगा।
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कठोर सजा: जबरन या धोखे से विवाह करने और एक से अधिक विवाह (बहुविवाह) करने पर 7 साल तक की कैद का प्रावधान है।
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लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने पर 3 महीने की कैद या 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य स्वतंत्रता छीनना नहीं बल्कि महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
विपक्ष का विरोध और चुनावी राजनीति का आरोप:
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कदम की कड़ी निंदा की और मांग की कि इसे विधानसभा की ‘सिलेक्ट कमेटी’ के पास भेजा जाए। कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में यह बिल पेश किया है।
“यह मुस्लिम विरोधी कानून है”: इमरान खेड़ावाला
कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा:”मुसलमानों के लिए निकाह और विरासत के मामले केवल कानून नहीं बल्कि अल्लाह के आदेश (शरीयत) हैं, जिनका पालन करना हमारा धार्मिक कर्तव्य है। यह बिल हमारे धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन है। हम इसके खिलाफ विरोध करेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।”उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के बाद गुजरात भारत का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने यूसीसी (UCC) कानून पारित किया है।
