Thursday, April 16, 2026
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मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राज्य प्रशासन की ‘पूर्ण विफलता’ करार

सोची-समझी साजिश और योजनाबद्ध कार्रवाई लगती है। राज्य प्रशासन पूरी तरह नाकाम ममता बनर्जी की जनता से शांत रहने की अपील… राज्य प्रशासन मेरे हाथ में नहीं है

नई दिल्ली/कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची की जांच कर रहे न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) पर भीड़ के हमले और उन्हें 8 घंटे तक बंधक बनाकर रखने की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे राज्य के नागरिक और पुलिस प्रशासन की “पूर्ण विफलता” करार देते हुए कहा कि यह घटना महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश और योजनाबद्ध कार्रवाई प्रतीत होती है।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों को रात 8:30 बजे तक कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली। राज्य सरकार द्वारा चुनाव आयोग (ECI) पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया:राजनीतिक नेता क्या कर रहे थे? क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं थी कि वे मौके पर पहुंचें और स्थिति को संभालें?”

बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ने कड़े लहजे में कहा: दुर्भाग्य से आपके राज्य में सब राजनीतिक भाषा बोलते हैं। हमने कभी इतनी अधिक ध्रुवीकृत (Polarized) स्थिति नहीं देखी, जहां अदालत के आदेशों के पालन में भी राजनीति झलकती हो। मैं खुद रात 2 बजे तक स्थिति की निगरानी कर रहा था, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

न्यायिक गरिमा को चुनौती

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह केवल अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर अदालत की अवमानना (Criminal Contempt) है। अदालत ने कहा कि इस कृत्य का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ना और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना था।

अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, कलेक्टर और मालदा के एसपी के व्यवहार को “अत्यंत निंदनीय” बताते हुए उन्हें नोटिस जारी किया और 6 अप्रैल को वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया। साथ ही चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इस घटना की जांच CBI या NIA जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

ममता बनर्जी की अपील: ‘प्रशासन मेरे हाथ में नहीं’

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में एक रैली के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से सहमति जताते हुए जनता से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा:“आज सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ कहा है, वह बिल्कुल सही है। कानून हाथ में लेने की इजाज़त किसी को नहीं दी जा सकती। मुझे मालदा की घटना की जानकारी एक पत्रकार के जरिए मिली, मुख्य सचिव ने मुझे एक बार भी सूचित नहीं किया।”

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि चूंकि चुनाव की प्रक्रिया जारी है, इसलिए प्रशासन अब सीधे तौर पर उनके नहीं बल्कि चुनाव आयोग के नियंत्रण में है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा “गद्दारों” के जरिए लोगों को उकसा रही है ताकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का बहाना मिल सके। उन्होंने प्रभावित मतदाताओं को आश्वासन दिया कि सरकार ट्रिब्यूनल में अपील के लिए उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी।

पृष्ठभूमि: मालदा की स्थिति

मालदा के कालियाचौक-II ब्लॉक में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सात न्यायिक अधिकारियों (जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं) को लगभग 8 घंटे तक घेरकर रखा था। देर रात पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला, जिस दौरान हुए पथराव में एक कांस्टेबल और दो नागरिक घायल हो गए। फिलहाल न्यायिक अधिकारी 60 लाख में से 49 लाख मामलों का निपटारा कर चुके हैं, जबकि शेष शिकायतों के लिए 19 ट्रिब्यूनल गठित किए जा रहे हैं।

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