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मेरठ में चुनावी धांधली की कोशिश: 200 मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश पर तनाव

मेरठ की इस गंभीर घटना पर आधारित एक संशोधित और प्रभावी रिपोर्ट नीचे दी गई है:

मेरठ | 13 फरवरी, 2026

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब किठौर विधानसभा क्षेत्र के अमीनाबाद गांव में मतदाता सूची से लगभग 200 लोगों के नाम अवैध रूप से हटाने की कोशिश का मामला सामने आया। आरोप है कि इन नामों में से अधिकांश मुस्लिम समुदाय के हैं और जीवित मतदाताओं को दस्तावेजों में ‘मृत’ या ‘क्षेत्र से बाहर’ (माइग्रेटेड) घोषित कर दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जब ग्रामीण अपने मतदाता कार्डों की जांच करने पोलिंग बूथ पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि भारी संख्या में नाम हटाने के लिए ‘फॉर्म-7’ जमा किए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 60 ऐसे लोग जो गांव में ही जीवित और मौजूद हैं, उन्हें कागजों पर ‘मृत’ दिखा दिया गया ताकि उनका वोट काटा जा सके।

भाजपा कार्यकर्ता पर आरोप

गांव के पूर्व प्रधान तालिब चौधरी ने सीधे तौर पर भाजपा से जुड़े एक स्थानीय व्यक्ति ‘मनवीर’ पर आरोप लगाए हैं। चौधरी के अनुसार, “मनवीर ने बीएलओ (BLO) को 200 से अधिक फॉर्म-7 सौंपे। जब हमने जांच की तो पता चला कि कई जिंदा लोगों को मृत दिखाया गया है।”

एक पीड़ित ग्रामीण मोहम्मद अयाज़ ने नाराजगी जताते हुए कहा, “मैं और मेरा पूरा परिवार यहीं रहते हैं, फिर भी मुझे ‘माइग्रेटेड’ दिखा दिया गया। यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।”

प्रशासनिक कार्रवाई: BLO निलंबित

मामला गर्म होते ही अमीनाबाद प्राइमरी स्कूल के पास भीड़ जमा हो गई और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर फॉर्म-7 के बंडलों का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।

  • कड़ी कार्रवाई: मेरठ के जिला मजिस्ट्रेट (DM) वी.के. सिंह ने मामले को ‘गंभीर चूक’ करार दिया। जांच में दोषी पाए जाने पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मोहम्मद ज़फर को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

  • नया BLO नियुक्त: डीएम ने स्पष्ट किया कि बीएलओ ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना इतने सारे फॉर्म स्वीकार किए, जो चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन है। अब वहां नया बीएलओ नियुक्त किया गया है।

  • भरोसा: प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

साजिश और अविश्वास का माहौल

इस घटना ने अल्पसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा और अविश्वास पैदा कर दिया है। स्थानीय युवाओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश लगती है ताकि एक खास समुदाय के मतदान अधिकारों को प्रभावित किया जा सके। निवासियों ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे भविष्य में भी सतर्क रहेंगे। एक प्रदर्शनकारी ने स्पष्ट कहा, “हमारा वोट हमारी ताकत है, हम किसी को भी चुपचाप इसे छीनने नहीं देंगे।”

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