बेंगलुरु: इंसाफ न्यूज़ ऑनलाइन
भाजपा समर्थित छात्र संगठन एबीवीपी के लगभग 20 सदस्यों ने सरजापुर रोड, बेंगलुरु स्थित अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (एपीयू) के कैंपस में हंगामा और तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ‘स्पार्क एपीयू रीडिंग सर्कल’ द्वारा 23 फरवरी 1991 को कुपवाड़ा के गांव कुनन पोशपोरा में कथित तौर पर भारतीय सशस्त्र बलों के हाथों कश्मीरी महिलाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर चर्चा के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम के जरिए “राष्ट्रविरोधी विचारों” को बढ़ावा दिया जा रहा है।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित ही नहीं किया गया था और प्रदर्शनकारी “गलतफहमी” का शिकार थे।
कार्यक्रम को “राष्ट्रविरोधी” और “कश्मीर अलगाववादी” बताते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्य द्वार के बाहर विश्वविद्यालय के नामपट्ट पर स्याही फेंकी, कैंपस की दीवारों पर ‘स्पार्क पर प्रतिबंध लगाओ’ जैसे नारे लिखे, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और नारेबाजी की। प्रशासन के अनुसार कुछ सुरक्षा गार्डों और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।
‘स्पार्क’ छात्र कार्यकर्ताओं की एक पत्रिका है, जबकि ‘स्पार्क एपीयू रीडिंग सर्कल’ को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) से जुड़ा बताया जाता है, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन का छात्र विंग है। 23 फरवरी को कथित घटना की याद में कुछ समूहों द्वारा ‘कश्मीरी महिला प्रतिरोध दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। भारतीय सेना इन आरोपों से इनकार करती रही है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में दायर एक याचिका पर दोबारा जांच के आदेश दिए थे।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने अंग्रेजी वेबसाइट ‘द वायर’ को दिए बयान में कहा, “प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और हमारे कुछ सुरक्षा गार्डों व छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया। सभी प्रदर्शनकारी बाहरी थे। उन्हें ‘स्पार्क एपीयू’ के एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गुमराह किया गया। यह हैंडल विश्वविद्यालय द्वारा अधिकृत नहीं है और न ही किसी रूप में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करता है। इस कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। हमारी नीति के अनुसार किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले अनुमति अनिवार्य है। इसके अलावा, संबंधित कार्यक्रम आयोजित ही नहीं हुआ था।”
प्रवक्ता के अनुसार घटना की सूचना तुरंत सरजापुर पुलिस स्टेशन को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 लोगों को हिरासत में ले लिया।
बुधवार (25 फरवरी) को जारी बयान में आईसा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कोई “तत्काल या प्रभावी कदम” नहीं उठाया। संगठन ने कहा, “एबीवीपी द्वारा कैंपस लोकतंत्र और छात्र समुदाय पर बार-बार हमले दरअसल बहस, असहमति और आलोचनात्मक सोच की जगह को दबाने की संगठित कोशिश का हिस्सा हैं।”
दूसरी ओर, एबीवीपी बेंगलुरु इकाई ने शहर के सभी कैंपसों में आईसा और उससे जुड़े ‘स्पार्क’ पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठन ने तोड़फोड़ के वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि विरोध के दौरान आईसा के सदस्यों ने कश्मीर से संबंधित अलगाववादी नारे लगाए और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया।
इसके विपरीत, ‘स्पार्क एपीयू’ से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया, “एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी में छात्रों पर चप्पलें फेंकीं ताकि उन्हें उकसाया जा सके, और बाद में सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार किया गया कि छात्रों ने राष्ट्रीय ध्वज पर चप्पलें फेंकीं।” सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस बस में सवार कुछ लोग बस के अंदर से छात्रों की ओर चप्पलें फेंक रहे हैं।
